ग़ज़ल / غزل

ग़ज़ल

कहाँ हो मेरे यार दिल की आरज़ू सुनो
आओ  क़रीब  बैठो  मेरे  रूबरू सुनो

दर्द  बेपनाह में इश्क़  को क्यों  छोडू
जल  रही है आँख सदा ए धू धू सुनो

आतिश ए सोज़ ओ सितम से है दर्द स्याह
कहता  है तेरी आँखों  की  ख़ुशबू  सुनो

तेरी लहर ए तबस्सुम पे लिखा है मेरा नाम  
लब ओ रुखसार  की कभी  जुस्तजू  सुनो

किस  तरह स्याही में मेरा चाँद घुल रहा
मुझ  को  ही पुकारता है तेरी बाज़ू सुनो


غزل 

کہاں  ہو  میرے  یار دل  کی  آرزو  سنو
آؤ   قریب   بیٹھو   میرے  روبرو  سنو

درد  بےپناہ  میں  عشق  کو  کیوں  چھوڑوں
جل  رہی  ہے   آنکھ  صدا  دھو  دھو  سنو

آتش  سوز و  ستم سے  ہے  درد  سیاہ
کہتا  ہے  تیری  آنکھوں  کی  خوشبو  سنو

تیری  لہر  تبسّم  پی لکھا ہے  میرا  نام
لب  و  رخسار  کی  کبھی  جستجو  سنو

کس طرح  سیاہی  مے  میرا  چاند  گھل  رہا
مجھ  کو  ہی  پکارتا  ہے  تیری بازو  سنو

No comments:

Post a Comment

Painting is Still Version of Theories and Literature

Recently I received an opportunity to witness paintings of Almas, a fine art studen...